राजस्थान की सियासत में 'यू-टर्न'—वागड़ के दिग्गज महेंद्रजीत मालवीय की कांग्रेस में वापसी, बोले "डबल इंजन में दम घुट रहा था, वो मेरी ऐतिहासिक भूल थी
जयपुर/नई दिल्ली, दिनांक: 12 जनवरी 2026 — राजस्थान की राजनीति के गलियारों में अक्सर वफादारी और बगावत के किस्से गूंजते रहते हैं, लेकिन रविवार को एक ऐसा सियासी घटनाक्रम हुआ जिसने वागड़ क्षेत्र (Vagad Region) के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। दक्षिणी राजस्थान के सबसे कद्दावर आदिवासी चेहरों में शुमार और पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय (Mahendrajeet Singh Malviya) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को अलविदा कहते हुए अपने पुराने घर यानी कांग्रेस (Congress) में वापसी का ऐलान कर दिया है।
करीब दो साल पहले, जब मालवीय ने कांग्रेस और विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था, तो इसे कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना गया था। लेकिन अब, 'डबल इंजन' सरकार के अनुभव को कड़वा बताते हुए उनकी घर वापसी ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में लिखी गई पटकथा
मालवीय की वापसी की स्क्रिप्ट दिल्ली में लिखी गई। रविवार को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में एक हाई-प्रोफाइल मुलाकात हुई।
- मौजूदगी: इस बैठक में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली मौजूद थे।
- ऐलान: इस बैठक के बाद मालवीय ने आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में लौटने की घोषणा की।
- पश्चाताप: प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसकी पुष्टि करते हुए एक बड़ी बात कही। उन्होंने बताया कि मालवीय ने स्वीकार किया है कि "भाजपा में जाना उनकी ऐतिहासिक भूल (Historical Blunder) थी।"
"जनता के काम नहीं हो रहे थे": मालवीय का दर्द
महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने अपनी वापसी की वजहों पर खुलकर बात की। उन्होंने भाजपा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। मालवीय ने कहा:
"मैंने डबल इंजन सरकार के भरोसे भाजपा जॉइन की थी, यह सोचकर कि क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। लेकिन वहां परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं। सरकार होने के बावजूद मैं अपनी जनता के छोटे-छोटे काम नहीं करवा पा रहा था। मेरा दम घुट रहा था। कार्यकर्ताओं और समर्थकों से लंबी चर्चा के बाद मैंने अपनी गलती सुधारने और घर लौटने का फैसला किया।"
मालवीय का यह बयान भाजपा सरकार के लिए असहज करने वाला है, जो सुशासन के दावे करती है।
भाजपा की प्रतिक्रिया: "पुराने साथियों की याद आ गई होगी"
मालवीय के जाने पर राजस्थान सरकार के मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भीलवाड़ा में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने इसे मालवीय का 'व्यक्तिगत फैसला' बताया।
खर्रा ने तंज कसते हुए कहा:
"जब वे कांग्रेस से भाजपा में आए थे, तब उनका वहां दम घुट रहा था। अब शायद भाजपा में परेशानी महसूस हो रही है, तो वे वापस सुकून की तलाश में गए हैं। हो सकता है पुराने साथियों से मिलकर उन्हें पुरानी यादें ताजा हो गई हों और वे अपने पुराने राजनीतिक घर लौट गए हों। इस पर ज्यादा टिप्पणी की जरूरत नहीं है।"
आलाकमान की मुहर और अनुशासन समिति का पेच
भले ही मालवीय ने वापसी का ऐलान कर दिया हो, लेकिन कांग्रेस ने प्रक्रिया का पालन करने की बात कही है। गोविंद सिंह डोटासरा ने स्पष्ट किया कि मालवीय की वापसी का प्रस्ताव पार्टी की अनुशासन समिति (Disciplinary Committee) के पास भेजा जाएगा।
- प्रक्रिया: समिति चर्चा करेगी कि क्या उन्हें वापस लिया जाना चाहिए और किन शर्तों पर।
- अंतिम फैसला: समिति की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व (High Command) अंतिम फैसला करेगा। हालांकि, शीर्ष नेताओं के साथ उनकी बैठक यह इशारा करती है कि हरी झंडी मिल चुकी है, बस औपचारिकता बाकी है।
वागड़ की राजनीति पर असर: आदिवासी वोट बैंक की जंग
महेंद्रजीत सिंह मालवीय कोई साधारण नेता नहीं हैं। वे कांग्रेस के टिकट पर एक बार सांसद, चार बार विधायक और दो बार मंत्री रह चुके हैं। बांसवाड़ा और डूंगरपुर के आदिवासी बेल्ट (Tribal Belt) में उनकी मजबूत पकड़ है।
- भाजपा को झटका: लोकसभा चुनावों से पहले उनका भाजपा में जाना कांग्रेस के लिए नुकसानदेह था, लेकिन अब उनकी वापसी से कांग्रेस को आदिवासी वोट बैंक को साधने में मदद मिलेगी। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के बढ़ते प्रभाव के बीच मालवीय की घर वापसी कांग्रेस के लिए संजीवनी हो सकती है।
हमारी राय (The Trending People Analysis)
राजनीति में 'आया राम, गया राम' की संस्कृति कोई नई नहीं है, लेकिन महेंद्रजीत सिंह मालवीय का यह यू-टर्न कई सवाल खड़े करता है। दो साल पहले जो पार्टी (कांग्रेस) उन्हें 'डूबता जहाज' लग रही थी, आज वही उन्हें 'सुकून का घर' लग रही है।
The Trending People का विश्लेषण है कि यह वैचारिक बदलाव से ज्यादा 'राजनीतिक अस्तित्व' की लड़ाई है। भाजपा में जाने के बाद मालवीय खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे थे। एक कद्दावर नेता के लिए बिना पावर के रहना मुश्किल होता है। उनकी वापसी कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा है, लेकिन इससे जनता के बीच नेताओं की विश्वसनीयता (Credibility) कम होती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वागड़ की जनता उनके इस 'पश्चाताप' को स्वीकार करती है या इसे महज एक अवसरवादी कदम मानती है।
